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अधिकार और कर्तव्य

कर्तव्य और अधिकार तो बिना पढ़े भी मालूम हो जाते हैं परंतु खूब पढ़ने-लिखने के बाद ये ज्ञान हो पा ता है कि - " कर्तव्य दूसरों के लिए होते हैं और अधिकार खुद के लिए" वाक़ई ज्यादा पढ़ा लिख...

अखण्ड भारत और राजनीति

मैं मात्र व्यक्ति नहीं बल्कि मैं ही भारत हूँ ये सारे राजनीतिक दल मेरे बेटे हैं ।           मुझको एक सफल बाप होने व अपनी प्रतिष्ठा, अखण्डता, स्वाभिमान बनाए रखने हेतु निष्पक्ष होकर उनके सही काम पर पीठ थपथपाना और गलती पर समझाना या थप्पड़ मारनेे का फैसला करना आना ही चाहिए। आदर्श द्विवेदी "अधूरा"

धर्म_और_धृष्टता

            वाकई एक दोषी की सजा या रिहाई का निर्णय उसकी दुष्टता के आधार पर ही होता है और अपने देश में तो ये तय है ही कि दोषी या पीड़ित का कोई न कोई धर्म या जाति भी होगी। हालांकि जा...