अधिकार और कर्तव्य
कर्तव्य और अधिकार तो बिना पढ़े भी मालूम हो जाते हैं परंतु खूब पढ़ने-लिखने के बाद ये ज्ञान हो पाता है कि -
"कर्तव्य दूसरों के लिए होते हैं और अधिकार खुद के लिए"
वाक़ई ज्यादा पढ़ा लिखा होना भी विशेष मूर्खता ही है।
-आदर्श द्विवेदी "अधूरा"
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